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आईडीडीआई रूपरेखा

आईडीडीआई रूपरेखा (Enlarge - Opens in a new window)

पहचान

  • आवश्‍यकता की पहचान:
    1. क) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का पालन करना।
    2. ख) आरटीआई शिकायत के विभिन्‍न पक्षों पर आवेदन करने हेतु एवं एक ऑनलाइन माध्‍यम से अपील करने हेतु कम्‍प्‍यूटरीकृत स्‍वचालित प्रणाली का निर्माण करना
    3. ग) आरटीआई से संबंधित शिकायतों और अपीलों की स्थिति पर नजर रखने की प्रणाली प्रदान करना।
  • लक्ष्‍य की प्राप्ति में शामिल मुख्‍य व्‍यक्तियों की पहचान करना:
    1. क) केन्‍द्रीय सूचना आयोग (नई दिल्‍ली, भारत) के दल और
    2. ख) राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केन्‍द्र (नई दिल्‍ली, भारत)
  • परियोजना के अध्‍याय को परिभाषित करना, जिसमें निम्‍नलिखित शामिल हैं:
    एनआईसी और सीआईसी के उद्देश्‍य, कार्यात्‍मक और भौगोलिक विस्‍तार, समय सीमाएं, स्‍वामित्‍व, निर्भरताएं, समीक्षा प्रक्रियाएं और जोखिम निपटान की प्रक्रिया तथा मुद्दे।
  • जहां है – जैसा है आधार पर पहचान के लिए अध्‍ययन करना:
    1. क) राष्‍ट्रीय आंकड़ा केन्‍द्र में भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल की मूल संरचना के तहत होस्‍ट किया जाए।
    2. ख) मौजूदा औपचारिक तथा अनौपचारिक प्रक्रियाओं का चयन और उन्‍हें समझना।
    3. ग) प्रक्रिया के आरंभिक और अंतिम बिन्‍दुओं को समझने के साथ सूचना आयुक्‍तों के बीच प्रक्रम सह संबंध और इसका सत्‍यापन।

डिजाइन

  • ‘आवश्‍यकता अंतराल’ विश्‍लेषण आयोजित करना:
    1. क) आरटीआई शिकायत और अपील के लिए एक दक्ष स्‍वचालित प्रणाली की आवश्‍यकता
    2. ख) संपूर्ण जीवन चक्र में स्थिति का पता लगाने की सक्षमता
  • पुन: अभियांत्रिकी प्रक्रम आयोजित करना:
    कुल स्‍थानों का अध्‍ययन जहां प्रक्रम पुन: अभियांत्रिकी की आवश्‍यकता है।
  • तकनीकी वास्‍तुकला की डिजाइनिंग:
    यह प्रणाली आवेदन की उपलब्‍धता और प्रति मॉड्यूल लेन देनों की कुल संख्‍या के साथ जुड़े महत्‍वपूर्ण प्राचलों द्वारा डिजाइन की गई थी।
  • प्रपत्रों की डिजाइनिंग:
    1. क) पुन: निर्मित प्रक्रम के अनुसार डिजाइन किए गए प्रपत्र
    2. ख) अनिवार्य दस्‍तावेजों को संलग्‍न करने की अनुमति वाले प्रपत्रों की डिजाइन
    3. ग) प्रपत्रों की सुरक्षा इन्‍हें डिजाइन करते समय एक प्रमुख कारक था स्‍पैमर से सुरक्षा प्राप्‍त करना।
    4. घ) प्रपत्रों की डिजाइन करते समय विचार में लिए गए मुख्‍य प्राचल - सरलता, सार्थकता, प्रारूप जमा करने के लिए लचीलापन और आंकड़ा संरचना में एक रूपता।

विकास

  • दो मॉड्यूलों के आधार पर विकास:
    1. क) फ्रंट एंड : नागरिक मॉड्यूल
    2. ख) बैंक एंड : प्रशासनिक मॉड्यूल
  • कार्यप्रवाह दस्‍तावेज का विकास:
    मापे जाने वाले भावी प्रक्रमों के लिए एक बैंचमार्किंग साधन के रूप में प्रयुक्‍त होने वाले कार्य प्रवाह दस्‍तावेज तैयार करना।
  • प्रपत्रों का विकास:
    आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रपत्रों का विकास और दो मॉड्यूलों में फैली डिजाइन विशिष्टियां अर्थात नागरिक और कार्य प्रवाह।
  • कार्य प्रवाह विकास:
    अंतराल विश्‍लेषण और प्रक्रम मानचित्रों के साथ आरटीआई के प्रावधानों के पालन द्वारा समवर्ती कार्य प्रवाह का विकास।

कार्यान्‍वयन

‘कार्यान्‍वयन’ अवस्‍था के उच्‍च स्‍तरीय चरणों पर प्रणाली को निर्मित करने और यूएटी के जरिए परखने की जरूरत होती है, ताकि इसके निष्‍पादन, स्‍वीकार्यता, सेवा कार्यान्‍वयन को मापा जा सके और प्रशिक्षण तथा सहायता दी जा सके एवं प्रणाली के रखरखाव और प्रचालन की कार्यनीतियां बनाई जा सके।

इसका परिणाम है “आरटीआई शिकायत और अपील प्रणाली” तथा विकसित मॉड्यूल को 1 दिसम्‍बर 2008 से कार्यान्वित किया गया है और इसे कार्य मिले हैं, इसका विवरण नीचे दिया गया है।